Tuesday, December 29, 2020

दर्शन शास्त्र क्या है?

आधुनिक पाश्चात्य संसार में जिसे philosophy कहते हैं , वह दर्शन नहीं है। दर्शन उससे बहुत आगे है, बहुत विस्तृत है। 

न्याय दर्शन के रचयिता गौतम मुनि ने परमाणु का पूरा विवरण उस समय लिखा,जिस समय यूरोप ने परमाणु की कल्पना भी नहीं करी थी। 
आधुनिक विज्ञान ने लगभग 1800 ई. में परमाणु (atom) की व्याख्या करी तथा उस पर शोध आरम्भ किया। 

न्याय दर्शन, जिसे Indian physics कहा जाता है, उसके रचयिता गौतम मुनि ने परमाणु के बारे में लिखा है। परमाणु शब्द, आज जिसे हम atom कहते हैं, वो वेदों के बाद,पहली बार गौतम मुनि ने बताया है।

परमाणु की व्यवस्थित व्याख्या; परमाणु क्या होता है; इतना सूक्ष्म होता है कि दिखता नहीं है, तो भी वह होता है; उसका यथार्थ माप, परिमाण; उसकी शक्ति; यह पूर्ण विवरण गौतम मुनि ने लिखित किया।  जिस समय यूरोप ने परमाणु की कल्पना भी नहीं करी थी, तब परमाणु का पूरा विवरण गौतम मुनि ने लिखा था

जालान्तर्गते भानौ यत् सूक्ष्मं दृश्यते रजः । 
तस्य षष्ठतमो भागः परमाणुः स उच्यते ।।

वातायन के जाल से (खिड़की से) अंदर आती सूर्य की किरणों में जो अति लघु कण दिखते हैं, उसके छठे भाग को परमाणु कहते हैं।

यह उदाहरण दर्शाता है की न तो वैदिक ज्ञान लुप्तप्रयोग अथवा अप्रचलित (obsolete) है तथा न ही ये व्यर्थ अथवा अप्रासंगिक (irrelevant) है।

आधुनिक विज्ञान के तीनों भागों – 
भौतिक शास्त्र (physics), 
रसायन शास्त्र (chemistry) और 
जीव शास्त्र (biology, zoology) का उद्भव इसी भारतीय दर्शन से हुआ है। इसके सभी मूलभूत सिद्धांतों को जानना, वैदिक विद्या को पढना व सीखना, आज के समय में प्रखर, तेजस्वी व रचनात्मक वैज्ञानिक व दार्शनिक बना सकता है।

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